Tuesday, 9 December 2014

दिल की कहें -


" ना मिला सुकून उमरभर फिर भी, एक चाहनेवाला था, ये काफी है। "

" चलना साथ में आसान कब था, पर रुकना भी किसी  की खातिर मुश्किल है,
   कुछ देर ही सही,रूक-कर तुमने, अपनी चाहत को और भी चाहत कर दी। "

" सच तो ये है के,वो भी नहीं रहा है वो, और मैं भी बदल गया हूँ अब। "

" कमी तुम में भी है ये बात सही है , पर कौन करे ग़मज़दा उसको, जिसे,
  दिल ने चाहा हो कभी।  "

" लिख तो सकता हूँ, मैंने पी  है, पर अगर, तुम होते,
  तो मैं बातें करता , लिखता क्यूँकर।  "

" शौक़ क्या है, क्या कहूँ, किसे कहूँ, और क्यों कर, 
  उसने पूछा नहीं , हमने बताया भी नहीं।  " 

" उसने गिराया मुझे हर बार, बार- बार , पर, 
  रेंगना, मेरी आदत थी और मैं रुका न कहीं। "