Tuesday, 14 April 2015

"कभी उम्मीद में रुकता भी था पर फिर कहाँ;
लोग बदल जातें है और उम्र भी बीत जाती है;चलते चलते"


"हर मौसम में बरसात का अपना रुतवा है, अगर छत रिसती भी हो तब भी। 
साथ हो तुम तो भी और दूर हो फिर भी; बारिश कभी यादों को बुझने नहीं देती।"


"क्या करते उम्मीद तुमसे, जो दे सकता था वो उसने दिया जो चाहिए था मुझे मिला न कभी।"

"ज़िन्दगी ने कभी तुमसे मिलाया मुझे फिर जिंदगी में क्या मिला क्या नहीं ये बात जाने देते हैं।"

"उम्र के दिन भी लम्हों में गुज़र जातें है कभी लम्हों को काटते -काटते उम्र गुज़र जाती है।"

'ज़िन्दगी का सफ़र रहा कुछ ऐसा मेरा, के उम्र बीतती गयी और सबक लेते गये पर फिर भी, कुछ नहीं सीखा अब तक"

'रुक कर भी देखा और इंतजार करके भी, जिसने कभी रफ़्तार न की हो कम वो क्या रुकेगा किसी मोड़ पे।'

"क्या है ज़िन्दगीं मै समझन को चला। मैं ही मैं था वहां और दूसरा कोई ना दिखा।"

कभी ख़याल आता है की लंबा कटा रासता, और कभी भूल ही जाते हैं की उम्र कितनी है, 
ये कहानी कुच्छ ऐसी रही की ख़त्म तो होनी थी, और दिल भी पढ़ता है उन्ही पुराने पन्नो को"


"Game sham ayi hai,, kuchh to naya mila mujhhko,, warna wahi, uski yaad ka aana aur fir hothon pe hansi.."

Generally im least interested to put any efforts to fit in a group which is heartless with any signs of selfish brain.

If i dnt belong to a place, i try my best to stay but my mind starts wandering to the places where i fit the most.

What a different world this would be if people would listen to those who know more and not merely try to get something from those who have more.

किसी को हरा के खुश हूँ; तो क्या मै हूँ; किसी के हारजाने में खुश हूँ; तो क्या खुश हूँ; बात बनती है जब जीता जाए; और बस जीत कर; आगेे जीतने को बढ़ जाये।

खुश होने और खुश दिखने में ज़रा सा फर्क होता है। खुश हो तो हो तुम नहीं तो prove करते रहना पड़ता है। dadicated to all selfi- lover



कभी आप किसी ज्ञानी बाबा के प्रभाव में आते हैं। आप खुद को दीन हीन समझने लगते हैं। आपको लगता है की आपमें बहुत सी कमियां हैं। सुधार की ज़रूरत है। आप बोलते ठीक से नहीं,ठीक सोचते भी नहीं, आपका हसना मुस्कुराना सब बस बेकार की बातें है, की दुनियां इन छोटी छोटी बातो से बड़ी है। ज्ञानी बाबा समझाते हैं; दुनिया में बस बड़े काम करो छोटा तो कोइ भी कर लेगा, बाबा को सब मालूम होता है, उनकी बात प्रभावित करती है, मगर सच मानीये बाबा को आपसे कोइ लेना देना नही रहता, उनको बस चेले चाहिये होते हैं, कई हो तो और अच्छा, बाबा को आपके होली दिवाली से कोइ लेना देना नही होता, आप खुश हैं या लड़के आयें है उन्हें पता तक नहीं चलता; आप कई छोटे छोटे काम उनसे बेहतर करते हैं मगर काम तो छोटे ही हैं, बाबा नहीं देखेंगे। ऐसे बाबा को उनके हाल पे छोड़ दीजिये ; उन्हें ज्ञान अर्जित करने दीजिए और आप अपने को सुधारने में लग जाईये; अपने हिसाब से, अगर आप ऐसा कर लेते हैं तो शायद आपका कुछ तो भला हो जाएगा। इसतरह बाबाजी को इगनौर करने से कम से कम हीनता का शिकार होने से बच सकतें है, आप।
( यहाँ बाबा का मतलब रिशते -नातेदार और आसपडोस वालें है)

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