बस थक के जहाँ भी बैठा हूँ, गली उसकी ही रही।
यूँ आगे बढ़ना भी कोई बात हुई,
कौन है जो चाहता हो, की ठिकाने बदले ,
ठिकानो को बदलें, उसकी मजबूरी होगी,
रहता है दिल में तो रहने देता ,
अब दमाग़ो मे भी उसका चेहरा होता है ,
बदरंग होता नहीं कोई रिश्ता लेकिन ,
रंग उतर जाता हैं जीते -जीते ,
बदलना कहाँ आॅंसा हुआ है उसका ,जो मिला हो कभी दिल से,
बदलते फिर भी हैं लोग जो नकाबों में मिलें,
ख़तम होगा भी और साथ भी रहा मेरे ,
ऐसे ही रहा है साथ वो अजनवी बनके,
कौन रुकता है जहाँ खाली हो मकाँ,और,
दिल की बात न कोई सुनने वाला न कहने वाला,
मैंने भी सुना है कि उसने पूछा है हाल मेरा,
बस जो ज़िन्दगी बीत भी जायें इतने भर से,
पूछ लेता उससे हँसी का सबब मैं भी,
खाली पड़ी आँखों से जो न आँखे मिलती,
अब उससे मेरा वास्ता कोई भी नहीं,
बस थक के जहाँ भी बैठा हूँ, गली उसकी ही रही।
Very Nice Aditi..
ReplyDeletethnx Anand for reading
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