Wednesday, 3 September 2014

हँसते  चेहरें ,

ख़ौफ़  खता हूँ उसके हँसते चेहरे से ,
रोती  आँखों  का सच  तो सुना है मैंने ,
हँसते रहने का हुनर अच्छा  है 
और चेहरे की हंसी भी एक मिसाल  ही ,
 फिर भी चाहता हूँ की उसको रोता देखूं,
पोछ सकूँ आँसू उसके, दिल से लगाऊँ उसके ग़म ,
कितना रोता होगा दिल उसका  भी ,
बेहतर है की वो रोना सीखे, 
ऐसे साथ मिले जो आँसू पोछें 
हँसी  सुनने  वाले तो सभी ग़ैर ही हैं ,ग़ैर ही होंगे,
उसको कोई अपना भी मिले, की वो रोना चाहे।

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